आत्मबोध से विश्वबोध" विषय पर केंद्रित व्याख्यान माला
कार्यक्रम प्रतिवेदन
आमंत्रित व्याख्यान माला प्रतिवेदन
"आत्मबोध से विश्वबोध" विषय पर केंद्रित व्याख्यान माला
कार्यक्रम की सामान्य जानकारी
आयोजन की तिथि: 12 दिसंबर 2025 (भारतीय भाषा दिवस)
आयोजन स्थल: सेमिनार हाल (पीएमएसओई), प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर
सत्र: प्रथम सत्र — प्रातः 12:00 बजे से
आयोजक विभाग: हिंदी विभाग एवं अर्थशास्त्र विभाग तथा अखिल भारतीय साहित्य परिषद, अनूपपुर इकाई (संयुक्त तत्वाधान)
कार्यक्रम संयोजक: डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग
कार्यक्रम समन्वयक: डॉ. अमित भूषण द्विवेदी
महाविद्यालय प्राचार्य: डॉ. अनिल कुमार सक्सेना
कार्यक्रम का उद्देश्य
इस व्याख्यान माला का आयोजन भारतीय भाषा दिवस के उपलक्ष्य में "आत्मबोध से विश्वबोध" विषय पर विद्यार्थियों, प्राध्यापकों तथा साहित्य-प्रेमियों में भारतीय दर्शन, संस्कृति और भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया। यह कार्यक्रम स्व. रमावती देवी की पुण्यस्मृति को समर्पित था।
कार्यक्रम का विस्तृत विवरण
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ वीणापाणि (सरस्वती) की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पूजन-अर्चन से हुआ। तत्पश्चात् सरस्वती वंदना और युवा संगीतकार मोहनीया गुप्ता के बाँसुरी वादन से कार्यक्रम का वातावरण सौंदर्यपूर्ण और भावमय हो गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सरसंघ चालक अनूपपुर श्री राजेंद्र तिवारी ने की।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सक्सेना ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आत्मबोध की प्रक्रिया में हम अपने अस्तित्व केंद्र से जुड़ते हैं तथा सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के साथ एकाकार होकर विश्वबोध की यात्रा तय करते हैं।
मुख्य वक्ता का परिचय एवं व्याख्यान
व्याख्यान माला के प्रथम वक्ता विश्व गीता प्रतिष्ठानम् के जिला प्रमुख श्री दीपक त्रिपाठी थे, जिन्होंने भारतीय चार्वाक दर्शन पर प्रकाश डालते हुए आत्मबोध के तत्व को व्याख्यायित किया।
मुख्य वक्ता डॉ. राकेश सोनी, प्राध्यापक दर्शनशास्त्र, अमरकंटक विश्वविद्यालय एवं अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद, महाकौशल प्रान्त ने अपने व्याख्यान में भारतीय भाषा की संरचनात्मक संवेदनाओं के मर्म से उपजे संस्कृति की अविच्छिन्न प्रवाह से आत्मबोध की यथार्थता एवं राष्ट्रबोध के संदर्भ में सभी की भूमिका पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए अत्यंत सरल शब्दों में 'आत्मबोध से विश्वबोध' की यात्रा का तुलनात्मक व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अपने उद्बोधन में डॉ. सोनी ने भारतीय संस्कृति की भारतीय ज्ञान परंपरा में अनुस्यूत 'अतिथि देवो भव' से 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की उदात्ता के महत्व को प्रतिपादित किया। जिला संघ चालक श्री राजेंद्र तिवारी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आत्मबोध ही वास्तविक ज्ञान है, जिसे हम व्यवस्थित और अनुशासित तप से प्राप्त कर सकते हैं।
आदि शंकराचार्य जी ने ज्ञान को उत्कर्ष और मोक्ष प्राप्ति का साधन बताया है — आत्मा ही परिपूर्ण और सर्वज्ञ है, आत्मबोध की साधना ही मोक्ष की प्राप्ति का साधन है, अतएव आत्मबोध की पराकाष्ठा ही विश्वबोध है।
व्याख्यान माला का सफल संचालन
व्याख्यान माला का सफल संचालन डॉ. नीरज श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष हिंदी, शासकीय तुलसी महाविद्यालय अनूपपुर ने किया। उन्होंने वेदान्त दर्शन के अनुसार कहा कि हम न तो शरीर हैं, न मन हैं अपितु हम शुद्ध चेतना या आत्मा हैं और यही ज्ञान हमें अविनाशी स्वरूप का एहसास कराता है।
उपस्थित गणमान्य अतिथि एवं प्रतिभागी
इस कार्यक्रम में निम्नलिखित गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे —
साहित्यकार एवं कलाकार पवन छिब्बर, डॉ. जे.के. संत विभागाध्यक्ष राजनीति शास्त्र, सुरेंद्र मिश्र प्राचार्य, डॉ. राधा सिंह विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान, श्री ज्ञान प्रकाश पाण्डेय विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र, डॉ. बृजेंद्र यादव, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष (माननीय उपस्थिति), डॉ. सुधा शर्मा सदस्य जिला उपभोक्ता आयोग अनूपपुर, डॉ. विनोद कोल, डॉ. अमित भूषण द्विवेदी, डॉ. दुर्गेश द्विवेदी, डॉ. बृजेंद्र सिंह, रोशन पुरी (प्रान्त परावर्तक) सहित काफी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
समापन
कार्यक्रम का समापन सत्र के अंत में डॉ. नीरज श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत गीत के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सक्सेना के संरक्षकत्व में सम्पन्न यह कार्यक्रम अत्यंत सफल, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा।
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