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विश्व खुशहाली रिपोर्ट 2026 का विश्लेषण

खुशी की तलाश और डिजिटल युग का छिपा हुआ संकट   डॉ. अमित भूषण द्विवेदी रात के 2 बज रहे थे। 14 साल की अनन्या अपने कमरे में अकेली बैठी थी — मोबाइल की नीली रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी। किसी अनजान व्यक्ति ने उसकी तस्वीर पर अपमानजनक टिप्पणी लिख दी थी। उस रात वह रोती रही। यह कोई कहानी नहीं है — आपने भी देखा होगा : सड़क किनारे घंटों एक ही जगह खड़ा युवा जो दुनिया से बेखबर स्क्रीन में गुम है , मेट्रो में आमने-सामने बैठे युवक-युवती जिनके सिर झुके हैं और रिश्ता नहीं बचा , घर में चिल्लाते माता-पिता और गुस्से में जवाब देता बच्चा , और सबसे दर्दनाक — वह नवजात शिशु जिसे डायपर बाँधकर , मुँह में बोतल थमाकर आँखों के सामने स्क्रीन रख दी गई है। जो बच्चा माँ की आवाज़ , स्पर्श और रोशनी से सीखता — उसे एक चमकती स्क्रीन के हवाले कर दिया गया है। उसकी घुटन का अहसास किसे है ? आभासी रिश्तों की भीड़ में घर के रिश्तों का मोल घट रहा है। इसी पीड़ा को विश्व खुशहाली रिपोर्ट 2026 ने पहली बार आधिकारिक आँकड़ों की भाषा में कहा है। किसी देश की असली तरक्की उसकी ऊँची इमारतों से नहीं , वहाँ के नागरिकों की मन की शांति से माप...

भारत में महिला अध्ययन: वैदिक ऋचाओं से 'गिग इकोनॉमी' तक का सफर

  "भारत में महिला अध्ययन: वैदिक ऋचाओं से 'गिग इकोनॉमी' तक का सफर" "क्या आपने कभी सोचा है कि जिस 'घरेलू श्रम' को हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं, वह देश की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत, मगर अदृश्य नींव है?"   नमस्ते विद्यार्थियों! मैं प्रीति वैश्य, शासकीय तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर के अर्थशास्त्र विभाग के इस विशेष ब्लॉग में आप सभी का स्वागत करती हूँ... ​🔶 परिचय: क्यों जरूरी है महिला अध्ययन? ​सोचिए, यदि हम किसी देश की प्रगति को नाप रहे हैं और हम वहां की आधी आबादी (महिलाओं) के योगदान को गिनना ही भूल जाएं, तो क्या वह गणना सही होगी? बिल्कुल नहीं। ​महिला अध्ययन (Women's Studies) इसी 'चूक' को सुधारने का नाम है। यह वह विषय है जो समाज, इतिहास और अर्थशास्त्र को महिलाओं के नजरिए से देखता है। भारत में इसकी जड़ें प्राचीन काल की गौरवशाली शिक्षा पद्धति में हैं, लेकिन आज के दौर में इसकी 'नवीन प्रवृत्तियां' (New Trends) पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक हो चुकी हैं। ​भारतीय ज्ञान परंपरा में नारी को 'शक्ति' और 'ज्ञान' (सरस्वती) का प्रतीक माना गया...

स्व. रमावती देवी स्मृति कवि गोष्ठी

  कार्यक्रम प्रतिवेदन स्व . रमावती देवी स्मृति कवि गोष्ठी प्रतिवेदन " स्व . रमावती देवी स्मृति " कवि गोष्ठी — शहडोल एवं अनूपपुर के कवियों का संगम कार्यक्रम की सामान्य जानकारी आयोजन की तिथि : 12 दिसंबर 2025 ( भारतीय भाषा दिवस ) आयोजन स्थल : सेमिनार हाल ( पीएमएसओई ), प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस , शासकीय तुलसी महाविद्यालय , अनूपपुर सत्र : द्वितीय सत्र — व्याख्यान माला के उपरान्त समर्पण : स्व . रमावती देवी ( डॉ . अमित भूषण द्विवेदी की माता जी ) की पुण्यस्मृति को समर्पित आयोजक विभाग : हिंदी विभाग एवं अर्थशास्त्र विभाग तथा अखिल भारतीय साहित्य परिषद , अनूपपुर इकाई ( संयुक्त तत्वाधान ) कार्यक्रम संयोजक : डॉ . नीरज कुमार श्रीवास्तव , विभागाध्यक्ष , हिंदी विभाग कार्यक्रम समन्वयक : डॉ . अमित भूषण द्विवेदी महाविद्यालय प्राचार्य : डॉ . अनिल कुमार सक्सेना   कवि गोष्ठी का उद्देश्य यह कवि गोष्ठी डॉ . अमित भूषण द्विवेदी की माता जी स्व . रमावती देवी की पुण्यस्मृति में आयोज...