सुरक्षित बचपन और समान शिक्षा—विकसित भारत 2047 की असली नींव- डॉ. अमित भूषण द्विवेदी

भारत आज एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है जहाँ वह अपने भविष्य की दिशा स्वयं तय कर सकता है। “विकसित भारत 2047” केवल एक सरकारी नारा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है—एक ऐसा सपना जिसमें हर नागरिक की भागीदारी और जिम्मेदारी निहित है। परंतु प्रश्न यह है कि विकसित भारत का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या यह केवल आर्थिक प्रगति, तकनीकी उन्नति और भौतिक समृद्धि तक सीमित है, या इसमें मानवीय विकास की गहराई भी शामिल है?

वास्तव में, किसी भी राष्ट्र की प्रगति का सबसे सशक्त संकेतक उसके बच्चों का जीवन स्तर होता है। इसलिए विकसित भारत का पहला और सबसे बुनियादी आधार होना चाहिए—सुरक्षित बचपन। आज भी देश के अनेक हिस्सों में बच्चे बाल श्रम, शोषण, कुपोषण और असुरक्षा के शिकार हैं। यदि हम 2047 तक एक सशक्त और संवेदनशील भारत का निर्माण करना चाहते हैं, तो यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बच्चा भय, अभाव और अन्याय से मुक्त होकर जी सके। उसका बचपन खेल, शिक्षा और सृजनशीलता से भरा हो, न कि संघर्ष और मजबूरी से।

दूसरा और उतना ही महत्वपूर्ण स्तंभ है—सभी बच्चों के लिए 12वीं तक निःशुल्क, अनिवार्य और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। आज सरकारी और निजी शिक्षा के बीच की खाई समाज में असमानता को और गहरा करती जा रही है। जब तक हर बच्चा, चाहे वह किसी भी वर्ग या क्षेत्र से आता हो, समान अवसरों वाली शिक्षा प्राप्त नहीं करेगा, तब तक वास्तविक समानता और सामाजिक न्याय का सपना अधूरा रहेगा।

समान शिक्षा केवल ज्ञान का प्रसार नहीं करती, बल्कि यह समाज में एकता, समझ और सहयोग की भावना को भी मजबूत करती है। यह देश की छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाती है, जो आगे चलकर नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के नए द्वार खोलती हैं। इस प्रकार शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की सबसे बड़ी शक्ति बन जाती है।

निस्संदेह, इस दिशा में अनेक चुनौतियाँ हैं—पर्याप्त बजट, प्रशिक्षित शिक्षक, पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण जैसी। परंतु यदि नीति-निर्माण में दूरदृष्टि, समाज की सक्रिय भागीदारी और राजनीतिक इच्छाशक्ति जुड़ जाए, तो ये चुनौतियाँ अवसरों में बदली जा सकती हैं।

विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब विकास को केवल GDP के आँकड़ों से नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन की गुणवत्ता से मापा जाएगा। जब हर बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर होगा, तभी भारत सच में विकसित राष्ट्र कहलाएगा।

अतः यह समय है कि हम यह स्वीकार करें कि “सुरक्षित बचपन और समान शिक्षा” ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है। यदि इस दिशा में ईमानदारी और संवेदनशीलता से कार्य किया जाए, तो 2047 का भारत न केवल समृद्ध होगा, बल्कि न्यायपूर्ण, मानवीय और आत्मगौरव से भरा हुआ भी होगा।

डॉ. अमित भूषण द्विवेदी, प्रधानमन्त्री उत्कृष्ट महाविद्यालय, शासकीय तुलसी महाविद्यालय, अनूपपुर में अर्थशास्त्र विषय के सहायक प्राध्यापक है.

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